सोमवार, 6 अप्रैल 2015

नोट सो लॉजिकल......

चेतावनी : ज्यादा "मॉर्डन " लोग इस ब्लॉग को पढ़के अपना समय बर्बाद ना  करे, धन्यवाद 

धर्म सदा ही एक विवादास्पद विषय रहा है, मैंने कुछ लिखने की कोशिश की है, आशा करता हु आप इसे समझने की कोशिश करोगे…

धर्म को लोजिक के तराजु से तोलना गलत है....
धर्म शांति और सत्य के वजूद की एक अहम वहज है, वो हमे जीने का सही तरीका सिखाते है.

हा मैं धार्मिक हु, और मुझे गर्व है अपने धर्म पे, जो मुझे इंसानियत के पाठ सिखाता है, जो मुझे शांति की अनुभूति करवाता है....

कमाल है ना, फेशन के नाम पे तुम बेमतलब के अजीब से टेटू गुदवाते सकते हो पर उस छोटे से ‘टिके’ को ओल्ड फेशन कहके नहीं अपना सकते....

थोड़ा अजीब लगता है जब तुम अपने जन्मदिन पर मोमबत्ती “बुझाने” को रस्म बताते हो पर चर्च में उसी मोमबत्ती के “जलाने” पे सवाल उठाते हो....

ये आपकी “स्किन” भी बड़ी सेंसिटिव है, उस मोल से खरीदे महेंगी असेसरी को वो शौख से पहनती है, पर उस दरगाह के मुलायम “धागे” से “एलर्जी” जताती है... 

शायद गंगाजल छिडकने से घर पवित्र नहीं होता, पर आपके फ़िल्मी स्टायल में उड़ाई शेम्पेन से जरुर कुछ फायदा होता होगा, नहीं ?!!!

मन्दिरों में आरती करने से नोइस पोल्युशन होता है, कुछ सीखिए उस “डीजे पार्टीयों” से जो कितना शांतिपूर्ण संगीत पिरोसती है....

अरे भैया आज के टाइम में कहा तुम ये गीता कुरान की बाते करते हो, twitter पे कोई हॉट ट्रेंड चल रहा हो तो बोलो हम उसपे अपने विचार रखेगे, और वो भी “खुल के”.......

मेरी ये सारी बाते शायद थोड़ी वाहियात हो सकती है, पर ये वही तराजु है जहा धर्म को तोला जाता है, लोजिक का तराजु....
दोस्तों धर्म में कुछ रित है जो हमे अनुशाशन, संयम और संस्कार सिखाती है, हो सकता है प्रेक्टिकली उससे कोई फायदा भी ना हो पर ये मेरा दावा है की सही रस्मो से कोई नुकशान भी नहीं है...

मैं ये नहीं कहता हु की हमे धर्म या मजहब को कट्टर तरीके से अपने जीवन में दाखिल करना चाहिए, पर हा उसके उस जीवन मूल्यों और शांति मंत्रो को हमे कभी नहीं भूलना चाहिए...
शुक्रिया :)