मंगलवार, 15 जुलाई 2014

गरीब बालक की भगवान को चिठ्ठी……


प्रिय भगवान जी,
                      में आपके भव्य मंदिर से थोड़ी ही दूर एक सरकारी स्कूल में पढ़ता हु। मेरे पिताजी एक मजदुर है और मेरी माँ दुसरो के घरो में बर्तन  मांजती है। में क्यों पढ़ रहा हु उसकी खबर तो मेरे माँ बाप को भी नहीं है,  शायद एक टाइम का मुफ़्त खाना और थोड़े स्कालरशिप के पैसे इसकी वजह हो सकती है……

मुझे किसीने कहा था तू सब की सुनता है इसी लिए तुजे कुछ   पूछना था……

1) में हर रोज तेरे मंदिर आता हु, तेरे  पास संगेमरमर का मंदिर है उसमे ac है लेकिन तेरे बच्चे की  स्कूल में अच्छी छत भी नहीं है । मुझे बारिश के पानी में बेठ के क्यों पढ़ना पड़ता है ?


2) तुजे हर रोज नए नए पकवान खाने में मिलते है और में हर रोज वो एक मुट्ठी चावल खा के सोता हु।मुझे भूखा क्यों सोना पड़ता है ?


3) तू हर रोज नए नए कपड़े पहनता है, बहुत खुबसुरत है सब पर मेरी छोटी बहेन के फटे कपड़े को कोई ठीक क्यों नहीं करता ?


मुझे प्लीज मेरे प्रश्नों का जवाब देना……
और एक गुज़ारिश है तुज से, तू बस अपनी एक दान पेटी हर साल मुझे दे दिया कर, मेरे माँ बाप के  पास मेरी फ़ीस के पैसे नहीं है, में तुजे वादा करता हु की में डोक्टर बनने के बाद तेरे नाम की होस्पीटल खोलूँगा।


अगर तू मेरी बातो पे ध्यान नहीं देगा तो मेरे पिताजी मुझे सामने की होटल में नौकरी पे लगा देगे फिर में तुजसे कभी बात नहीं  करूंगा। तो जल्दी से मेरी बातो का जवाब देदे………

                                                                            तेरी एक गरीब औलाद


ये "डॉ आई के विजली वाला" की एक कहानी है थोड़े बदलाव के साथ :)

अपनी राय जरुर दे………
                                                                 
     


बुधवार, 9 जुलाई 2014

बेटी


"बेटी" ……
भगवान से मिलने वाला एक अनमोल तोहफ़ा :)
नाज़ुक, मासूम, खुबसुरत………

                  हमारे देश में कुछ लोगो की सोच है की बेटी एक बोझ है। सिर्फ गाँव नहीं शहर में भी ये मंजर आम है। लोग बेटी को वो सुविधा या आज़ादी नहीं देते जो एक बेटे को देते है, उनके हुनर और काबिलयत को भी नज़र अन्दाज़  किया जाता है।
कुछ लोग तो अपनी बेटी को उसकी माँ के पेट में ही दफन कर देते है :(

आखिर क्यों ?

इस लिए क्यों की वो तुम्हारे वंश को आगे नहीं बढ़ाएगी………
अरे तो आपका पोता भी तो किसीकी बेटी की कोख में ही पलने वाला है……

कुछ बेवकूफ़ लोग कहेते है बेटी में वो ताकत वो काबिलियत नहीं है जो एक बेटे में है………
इन लोगो को किरण बेदी जी जैसे किसी महिला से मिलवाने चहिए………
गाल की लाली सारी अक्ल ठिकाने पे ला देगी……

कुछ लोग उनके भविष्य से चिंतित है। वो बेटी की शादी के खर्चे, पढाई के खर्चे नहीं उठा सकते………… लेकिन सोचने वाली बात है की वो लोग लड़के के इन्ही खर्चे को लाज़मी मानते है और उसके सारे खर्चे उठाते है। ये तो वही बात हो गई की उस बेंक में ज्यादा ब्याज मिल रहा है तो वहा इन्वेस्ट करू………
जनाब रिश्तो की दौलत को कभी दिल की आँखों से देखो…… उस बेटी से सही और कोई नहीं दीखेगा "रिश्तो की दौलत" को सँभालने लायक…………

कुछ लोग समाज की दुहाई देते है……
उनका मानना है की समाज में बेटी आज इतनी सुरक्षित नहीं है………
शायद सही है ये पर हम ही तो मिलके इस समाज को बनाते है……
समाज की गंदगी साफ भी तो हमे ही करनी होगी………
अच्छे संस्कारो की नीव डाल के, अपनी  कानून व्यवस्था मजबूत करके, ऐसे जुल्मों के खिलाफ़ आवाज उठा के……

ये लोग भी अजीब है……
घर की लक्ष्मी का आदर नहीं करते और मंदिर में देवी माँ की पूजा करते है………

 ऐसा नहीं है की समाज के सारे लोगो की सोच ऐसी है।
काफी लोग ऐसे है जो लड़के और लड़की में कोई भेद नहीं करते…
समाज में ऐसे लोग भी है जो लड़कियों को गोद लेके उन्हें पढाते है, काबिल बनाते है………

हीरो उन सभी लोगो को वंदन करता है __/\__

स्वानंद किरकिरे जी का सुंदर गीत……

ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे

ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे

अंधियारा है घना और लहू से सना
किरणों के तिनके अम्बर से चुन्न के
अंगना में फिर आजा रे
हमने तुझपे हज़ारों सितम हैं किये
हमने तुझपे जहां भर के ज़ुल्म किये
हमने सोचा नहीं
तू जो उड़ जायेगी
ये ज़मीन तेरे बिन सूनी रह जायेगी
किसके दम पे सजेगा अंगना मेरा

ओ री चिरैया, मेरी चिरैया
अंगना में फिर आजा रे
तेरे पलकों में सारे सितारे जंडू
तेरी चुनर सतरंगी बनूं
तेरी काजल में मैं काली रैना भरूं
तेरी मेहंदी में मैं कच्ची धूप मलू
तेरे नैनों सज़ा दूं नया सपना

ओ री चिरैया
अंगना में फिर आजा रे

ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे
ओ री चिरैया ...

शुक्रिया :)
अपनी राय जरुर दे

वंदन __/\__


श्रीजी


“वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा”


ये मेरा पहेला ब्लॉग है।
में अपने प्रभु को और बा को वंदन करता हु __/\__