ट्रेन - 4
“चल भाई, तुजसे मिल के बड़ा
मजा आया, भोपाल आओ तो याद जरुर करीयो”
ट्रेन भोपाल स्टेशन पे थी
और सलमान खान मुझे बाय बोल रहा था, मैंने भी औपचारिकता निभा दी, सुबह के 6 बज गये
थे, नींद तो अब आने से रही,में फिर पहुँच गया शर्द हवाओ का हाल जानने....
स्टेशन दर स्टेशन नजारा
खुबसुरत बन रहा था, दूर क्षितिज में कोई सूरज अंगड़ाई ले रहा था....
आदत से मजबूर में फिर पहुँच
गया अपने लेपटोप के पास...
कुछ नजारे लिखने....
कुछ फ़साने लिखने....
“गुड मोर्निंग” सबसे उपर
वाली बर्थ से आवाज आई...
मैंने उपर देखा तो एक मासूम
सी मुस्कान उसके होठों पे खेल रही थी....
“गुड मोर्निंग” मैंने भी
कुछ उसी लहजे में उनको विश किया...
आयुष अभी भी सो रहा था बाकि
तीन इंजनियर भोपाल उतर गये थे, अब में और एक खुबसुरत अजनबी ही बचे थे जो कुछ बात कर
सके....
वो निचे उतरी थोडा डिस्टेंस रख के मेरी ही सिट पे बैठ गई....
“so
आप लिखते हो?” उसकी नजर मेरे लेपटोप पे थी...
कोई
जब मुझे लिखता देखता है तब में थोडा असहज हो जाता हु...
मैंने
जट से लेपटोप बंध किया, “नहीं वो तो बस ऐसे ही” मेरी जुबान थोड़ी लड़खड़ाई....
“Hii,
में कशिश” उसने लम्बी उंगलियो वाला हाथ आगे बढ़ाया...
उसके
नेल पेंट का कलर उसके टॉप से मेच कर रहा था, मैंने सोचा लडकिया ऐसी चीजो के लिए
टाइम कहा से निकाल लेती है....
“कुश”
मैंने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया...
पहेली
बार मैंने उसके चहरे को गौर से देखा, बड़ी गोल आँखे थी, अभी अभी खुलने की वजह से वो
बहुत प्यारी दिख रही थी, उसके गाल में शायद किसीने कश्मीरी सेब फसाया था, उसके होठो को देख
के लग रहा था की उसने अभी अभी लिपगार्ड लगाया था, उसके बदमाश बाल बिखरे पड़े थे,
कुछ उसके कान को तंग कर रहे थे तो कुछ आपस में ही उलज रहे थे, यकीनन वो बहुत
खुबसुरत थी J
(आमतौर
पे लडकिया उठने के तुरंत बाद काफी अजीब लगती है पर यहा केस थोडा अलग था)
“so
कुश कहा से हो आप?”
“इंदौर,
आप?”
“मैं
कटनी से हु अभी बेंगलुरु जॉब करती हु, आप क्या करते हो ?”
“मैं
पार्ट टाइम पढाई और फुल टाइम मजे करता हु”
मेरी
बात सुनके उसकी आँखे भी हँसने लगी, बहुत खुबसुरत नजारा था....
“इंजनियरिंग
के लास्ट सेम में हु”
और
तभी कुम्भकर्ण जागा...
“गुड
मोर्निंग आयुष”
लड़की
पास में होने से मैंने उसे आम लोगो की तरह wish किया (इंजनियरिंग में विश करने की
प्रथा कुछ अलग होती है;))
“गुड
मोर्निंग भाई कहा पहुंचे?”
“सुजालपुर
निकला अभी, btw रात को तेरे लिए कोल आया था..”
फिर
मैंने उसे रत को 12 बजे आये उस बुरे सपने की डिटेल्स बताई....
“मैं
क्या करू इस लडकी का?”
“छोड़
दे” मेरा अंतर्मन फिर चिल्ला उठा...
“पास
वाले कोच में प्लग है, तू फोन चार्ज करले और अभी मेरे फोन से उससे बात करले”
आयुष
“रिमांड कोल” की तरफ बढ़ा, और अब सेक्शन में दो ही लोग थे....
कशिश
ने इयरप्लग लगाये हुए थे, बिच बिच में वो गीत की लाइन्स गाने लगती थी, उसकी इस
हरकत पे मैं हौले से मुस्कुराता था, मुझे देख वो भी हँसती थी...
कुछ
देर बाद में फिर दरवाजे के पास पहुंचा, हमेशा की तरह कुदरत ने एक और खुबसुरत नजारा
मेरे सामने पेश किया....
मैं
कशिश और कुदरत की खूबसूरती की तुलना करने लगा, मुझे भी नहीं पता की मैंने ऐसा
क्यों किया?!
जो
भी हो मुझे लिखने को नया मटिरियल मिल रहा था, मैं फिर गया अपने लेपटोप के पास और “हीरो”
बन गया...
कशिश
ने इयरप्लग हटाये और मेरी सिट पे आके बैठ गई, इस बार दुरी कम थी जो मुझे थोडा असहज
बना रही थी...
वो
कुछ बोली नहीं बस पढने लगी...
फिर
धीरे से मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराके पूछा “कहा से सिखा ऐसा लिखना?”
इस
प्रश्न का जवाब, मैं शायरी में दे देता पर वो थोडा ज्यादा हो जाता तो मैंने मामले
को रफा दफा करने का फैसला किया...
“अरे
ये शायरी, कुछ बड़े शायरों की रचनाए है मैंने कही सुनी तो उसे अपने कलेक्शन में रख
रहा हु”
उसे
ये बोलते वक़्त मेरा उससे eye-contact नहीं था ....
तभी
वहा से एक चाय वाला निकला...
“भैया
दो चाय करना”
उसने
अपने ओरेंज पर्स से बीस रुपये निकाले, मैं अपने जींस से अपना वोलेट छिनने में लगा
था पर आख़िरकार जींस जीती, उसने पैसे दे दिए थे....
मैंने
अपने नास्ते की बेग से “गुड डे” का पेकेट निकाला...
वो
खड़ी होकर अपने बाल ठीक करने लगी और फिर उसे बांधने लगी...
“अरे
उसे खुल्ले रखो” मेरा अंतर्मन फिर बोला...
मुझे
कभी समज नहीं आया की लडकी के साथ convo कैसे चालू करना चाहिए....
“चाय
अच्छी है” मैंने ऐसे तारीफ की मानो उसने अपने हाथो से ये चाय बनाई हो....
फिर
हम बैंकिंग और इंडस्ट्री सेक्टर पर गंभीर चर्चा पे आगे बढ़े...
मुझे
समज नहीं आ रहा था की मैं उस लडकी को क्यों पका रहा था ?!
बिच
बिच में मन किया की एक दो शायरी बोल के या कोई जोक सुना के उसे फिर हँसता हुआ
देखु....
धीरे
धीरे जैसे मैं अपने कम्फर्ट ज़ोन में आया, मेरी जुबान और दिल का कनेक्शन बैठ गया,
अब हम दोस्तों की टोन में बात कर रहे थे....
थोड़ी
देर में मैं उसे इंजनियरिंग नमूनों के किस्से सुनाने लगा, हम दोनों जोर जोर से
हँसने लगे, वहा से निकलने वाले अंकल लोग हमे घूरते हुए जाते थे...
सब
सही जा रहा था तभी कबाब में हड्डी आ गई, सोरी आ गया....
“हाय
में आयुष इसका दोस्त”
‘इसका’???
साले को मेरे अंतर्मन ने गालियों से नवाजा...
“हेल्लो
आयुष”
फिर
थोड़ी इधर उधर की बाते हुई, पर अब वो मजाक मिसिंग था, कशिश भी वो हसी मिस कर रही थी
(शायद), पर मेरा ये नालायक दोस्त अपनी फटी बातो से बाज ही नहीं आ रहा था...
“हे
भगवान, इस पापी को तू फिर “टॉर्चर कोल” दे” मेरे अंतर्मन ने भगवान को DM किया...
भगवान
ने सुन ली....
“कुश
मैं दो मिनिट में आया कोल अटेंड कर के”
मैंने
गाड़ी फिर चालू की पर पहेले गियर से...
“so
आप कटनी के बारे में कुछ बताओ...”
“क्या
बताऊ अब, वो मेरे लिए शायद दुनिया की सबसे खुबसुरत जगह है, मेरा बचपन वही बिता है,
पता है हम रेलवे ट्रेक के पास वाली सडक पे साईकिल की रेस लगाया करते थे....”
मैं
सुनता गया या बस देखता गया....
मेरे
सामने कोई 12-14 की लडकी मुस्कुराके अपनी कहानी बता रही थी...
कितना
सुकून...कितनी ख़ुशी....
मैं
तो उस मासूमियत में खो गया था...
काश
ये ट्रेन यु ही चलती रहे...
काश
ये लडकी यु ही बोलती रहे....
“भाई
देवास आ गया” आयुष ने फिर गलत वक़्त पे एंट्री मारी थी....
“कुछ
खाओगे भाई?” आयुष फिर पेट पूजा की सामग्री लेने जा रहा था....
“नहीं,
आप कुछ लोगे?” मैंने कशिश से पूछा...
“no
thanks”
अब
इंदौर नजदीक था तो हमने हमारा सामान समेटना चालू कर दिया...
कशिश
ने तभी अपना मेकउप बॉक्स खोला और अपने चहेरे को बिगाड़ने लगी...
“मत
कर यार” अगेईन अंतर्मन....
अब
इंदौर बस कुछ मिनीटो की दुरी पर था, आयुष फिर “टॉर्चर कोल” में बिजी था, कशिश
सामने बैठी थी...
मैं
उसे देख मुस्कुराया, मुझे लगा की अब उसे शायद कभी नहीं मिल पाउँगा, क्या उसे WA या
FB के लिए पूछना सही होगा ?? मैं आमतौर पे कभी किसीको नहीं पूछता....
“वो
लाइन्स तुमने ही लिखी थी ना ? मुझे मालूम है..... बहुत खुबसुरत लिखा है”
मैं
जवाब में सिर्फ हल्का सा मुस्कुराया...
इंदौर
स्टेशन पे ट्रेन आ गई, सब प्लेटफॉर्म के बहार निकले, आयुष ऑटो लेने गया....
“आप
काफी खुबसुरत हो”
वो
कुछ नहीं बोली बस मेरी आँखों में देखती रही, शायद मेरी आँखों में कुछ ढूंढॅ रही थी
वो....
“Bye”
वो ज्यादा गहेराइ में जाये उससे पहेले ही मैं अपने रास्ते मुड़ गया....
शुक्रिया
J
अपनी
टिप्पणियाँ देना ना भूले.....