"बेटी" ……
भगवान से मिलने वाला एक अनमोल तोहफ़ा :)
नाज़ुक, मासूम, खुबसुरत………
हमारे देश में कुछ लोगो की सोच है की बेटी एक बोझ है। सिर्फ गाँव नहीं शहर में भी ये मंजर आम है। लोग बेटी को वो सुविधा या आज़ादी नहीं देते जो एक बेटे को देते है, उनके हुनर और काबिलयत को भी नज़र अन्दाज़ किया जाता है।
कुछ लोग तो अपनी बेटी को उसकी माँ के पेट में ही दफन कर देते है :(
आखिर क्यों ?
इस लिए क्यों की वो तुम्हारे वंश को आगे नहीं बढ़ाएगी………
अरे तो आपका पोता भी तो किसीकी बेटी की कोख में ही पलने वाला है……
कुछ बेवकूफ़ लोग कहेते है बेटी में वो ताकत वो काबिलियत नहीं है जो एक बेटे में है………
इन लोगो को किरण बेदी जी जैसे किसी महिला से मिलवाने चहिए………
गाल की लाली सारी अक्ल ठिकाने पे ला देगी……
कुछ लोग उनके भविष्य से चिंतित है। वो बेटी की शादी के खर्चे, पढाई के खर्चे नहीं उठा सकते………… लेकिन सोचने वाली बात है की वो लोग लड़के के इन्ही खर्चे को लाज़मी मानते है और उसके सारे खर्चे उठाते है। ये तो वही बात हो गई की उस बेंक में ज्यादा ब्याज मिल रहा है तो वहा इन्वेस्ट करू………
जनाब रिश्तो की दौलत को कभी दिल की आँखों से देखो…… उस बेटी से सही और कोई नहीं दीखेगा "रिश्तो की दौलत" को सँभालने लायक…………
कुछ लोग समाज की दुहाई देते है……
उनका मानना है की समाज में बेटी आज इतनी सुरक्षित नहीं है………
शायद सही है ये पर हम ही तो मिलके इस समाज को बनाते है……
समाज की गंदगी साफ भी तो हमे ही करनी होगी………
अच्छे संस्कारो की नीव डाल के, अपनी कानून व्यवस्था मजबूत करके, ऐसे जुल्मों के खिलाफ़ आवाज उठा के……
ये लोग भी अजीब है……
घर की लक्ष्मी का आदर नहीं करते और मंदिर में देवी माँ की पूजा करते है………
ऐसा नहीं है की समाज के सारे लोगो की सोच ऐसी है।
काफी लोग ऐसे है जो लड़के और लड़की में कोई भेद नहीं करते…
समाज में ऐसे लोग भी है जो लड़कियों को गोद लेके उन्हें पढाते है, काबिल बनाते है………
हीरो उन सभी लोगो को वंदन करता है __/\__
स्वानंद किरकिरे जी का सुंदर गीत……
ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे
ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे
अंधियारा है घना और लहू से सना
किरणों के तिनके अम्बर से चुन्न के
अंगना में फिर आजा रे
हमने तुझपे हज़ारों सितम हैं किये
हमने तुझपे जहां भर के ज़ुल्म किये
हमने सोचा नहीं
तू जो उड़ जायेगी
ये ज़मीन तेरे बिन सूनी रह जायेगी
किसके दम पे सजेगा अंगना मेरा
ओ री चिरैया, मेरी चिरैया
अंगना में फिर आजा रे
तेरे पलकों में सारे सितारे जंडू
तेरी चुनर सतरंगी बनूं
तेरी काजल में मैं काली रैना भरूं
तेरी मेहंदी में मैं कच्ची धूप मलू
तेरे नैनों सज़ा दूं नया सपना
ओ री चिरैया
अंगना में फिर आजा रे
ओ री चिरैया
नन्ही सी चिड़िया
अंगना में फिर आजा रे
ओ री चिरैया ...
शुक्रिया :)
अपनी राय जरुर दे
बहुत बडिया लिखा है भाई .. लिखना जारी रखे आपको बहुत सादुवाद
जवाब देंहटाएं@BahutKrantikari
शुक्रिया भाई :)
हटाएंआप बस अपना आशीर्वाद बनाए रखे, में कोशिश जारी रखुगा :)
बहोत ही खुबसुरत भाई :)
जवाब देंहटाएं@ipankaj_soni