शुक्रवार, 6 मार्च 2015

ट्रेन - 3

ट्रेन - 3

अब ट्रेन कटनी स्टेशन पे थी....
“लो भाई, होम मेड है” चंगेज खान ने मुझे केक ऑफर की...
मैंने एक टुकड़ा उठाया और उसी वक़्त एक आवाज आई “excuse me, जगह दीजिये प्लीज”, बेशक इंजनियरिंग कान ने आवाज सुनके लडकी की ऊम्र का पता लगा लिया था...
हा, ये शाफ़्ट हमारे गियर बॉक्स की थी..... ;)
वो जैसे ही हमारे सेक्शन में दाखिल हुई, एक साथ 16 आँखे उसपे अटक गई...
मैंने केक का टुकड़ा मुह में रखा, वो वाकई लाजवाब थी, सॉफ्ट एंड स्वीट (में यहा केक की बात कर रहा हु ;)) मैंने अगले ही पल अपनि आँखे केक पे केन्द्रित कर ली, पर बाकि की आंखे अभी भी वही अटकी थी, उसने जोर से अपना बेग पछाड़ा और सब जाग गये....
वो फटाफट अपनी सिट पे गई, जो की मेरे सामने की साइड सब से उपर थी....
एक लडकी कैसे पुरे सेक्शन का माहौल बदल सकती है वो अब मुझे समज आ रहा था, सलमान खान बार बार अपने ‘दबंग स्टाइल’ चश्मे से खेल रहा था, मुझे समज नहीं आया की वो इस अँधेरे में काले चश्मे लगाके (इन शोर्ट मिका सिंह बन के) क्या सिद्ध करना चाहता था?!!!
अपना चंगेज खान खुद का पेट अंदर खींचे बैठा था, ऐसा लग रहा था की वो बाबा रामदेव को प्रसन्न करने हेतु तपस्या में बैठा है.....
आयुष अलग अलग एंगल से सेल्फी लेके अपने फोन पे छपे “सेब” के सिम्बोल को एक्सपोस कर रहा था...
मैं उन लोगो को पर्याप्त जगह मिले इस लिए लडकी के नीचे वाली सिट पे सिफ्ट हो गया था...
पर शायद लड़की के फीके रिस्पोंस ने उन लोगो को मायूस कर दिया, कुछ देर में सेक्शन का माहौल फिर से सामान्य हो गया, अब सब नोर्मल थे....
“भाई तुमने अच्छी ली अंकल की”
‘अच्छी ली’ शब्द मुझे थोडा जमा नहीं, पर मैंने उसके जवाब में बस हल्की सी स्माइल दी, आगे भी उस टॉपिक पे काफी चर्चा हुई और बार बार मेरा भी उल्लेख होने लगा, मेरे लिए अब माहौल थोडा स्ट्रेसफुल हो गया, मैं उठ के दरवाजे के पास पहुंच गया.....
बहार सिर्फ अँधेरा था, बहुत दूर कोई किसान टोर्च लेके अपने खेत में घूम रहा था, अचानक मुझे स्टेशन पे खड़े उस फौजी की याद आ गई, मूल्यवान था वो पल जब मैंने “धरती माँ” के दोनों सपूतो के दर्शन एक साथ किये.....
जबलपुर आ गया, सेक्शन खाली होने लगा, आयुष ने नीचे से बेग निकल के मुझे थमा दी...
“एक मिनिट पकड़ में चार्जर निकाल लेता हु”
मैं बेग पकड़ के खड़ा रहा, पर एकबार भी मैंने नजर उपर नहीं उठाई (btw साइंस कहेता है की गरदन को 45 से ज्यादा के एंगल में उपर उठाने से गरदन में दर्द होता है)
“हेल्लो”
आवाज उपर से आ रही थी, 50 के एंगल से......
“आप प्लीज मेरे लिए एक बोटल पानी और स्प्राइट ला देंगे”
“नौकर हु क्या तेरा??!” मेरा अंतर्मन कुछ यु चिल्लाया
“sure” पर पता नहीं गले ने ऐसी आवाज क्यों निकाली ?!
उसने पैसे देने के लिए हाथ आगे किया और मैंने बेग आयुष के पैर पे दे मारा....
“क्या कर रहा है बे, भेन्चो....”
मैं पैसे लेके स्टोल पे गया, बहुत भीड़ थी वहा और आसपास कोई स्प्राइट भी नहीं बेच रहा था, वहा स्प्राइट हासिल करना किसी रोडीज के टास्क से कम नहीं था, पर आखिरकार स्प्राइट मेरे हाथ में थी....
मेरी नजर ट्रेन पर पड़ी...
“ओह्ह नो...”
ट्रेन धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी...
मेरे अन्दर का मिल्खा सिंह जाग गया, और बड़ी मुश्किल से मैंने खुद को ट्रेन के अंदर किया....
साले सारे राज बस सिमरन को ही हाथ देते है....
“मुझे लगा तेरी ट्रेन छुट गई” आयुष चिप्स में बीजी था....
“ओह्ह सोरी मेरी वजह से आपको इतनी परेशानी हुई”
“कुछ खास नहीं” मैंने बेशकीमती स्प्राइट और पानी को उसके हाथ में सौपा...
“थैंक्स”
जवाब में मैंने भी हल्की सी मुस्कान दी...
मेरे साथ वाले बाकि चार इंजनियर हमारे convo से थोड़े uncomfortable लग रहे थे, मैंने माहौल को थोडा मजेदार बनाने के लिए, कृष्णा भाई, नवाब भाई और किट्टूदादा  के कुछ tweets उनके सामने पेश किये ( सेक्शन में लड़की होने की वजह से आइटम Veg होना लाजमी था)
सब लोग मुड में आ गये और महफिल जम गई, हसी मजाक ने दो पल के लिए सारी थकान भुला दी...
मैंने मनोमन अपने Twitter के दोस्तों को सेल्यूट किया.....
हम सबपे अब नींद का नशा चढने लगा था, कुछ पल में हमने एक दुसरो को गुड नाईट बोला....

“साला सपने में भी फोन वाइब्रेट होता है क्या?, अबे नहीं ये तो सच में हो रहा है” मैंने खुद को जगाया...
स्क्रीन पे कोई unknown नम्बर था...
“हेल्लो”
“हेल्लो कुश तुम लोग पागल हो क्या? आयुष को कितने कोल लगाये हर बार स्विचऑफ़ और WA पे भी कोई रिप्लाय नहीं कर रहा”
“अबे आलिया की कजिन जब फोन ही बंध है तो WA पे रिप्लाय क्या मार्क ज़ुकर्बर देगा??!” मेरा अंतर्मन चीख उठा.....
(ये जिसे में रात के बार बजे झेल रहा हु वो आयुष की गर्लफ्रेंड है, बदकिस्मती से)
“अरे नहीं वो क्या है ना यहा का प्लग काम नहीं कर रहा तो उसके फोन की बेटरी डाउन हो गई, मैं सुबह बात करवाता हु उससे”
दो-तीन और डायलोग के बाद मेरा फोन उस भयानक आवाज से आजाद हुआ.....
मुझे अचानक, अपनी gf का मर्डर करके जेल में गये उन बिचारे बॉय फ्रेंड्स के प्रति सवेंदना हुई....
अभी मेरी आँख लगी ही थी की फिर फोन वाइब्रेट हुआ......
“ओह्ह्ह not again...”
पर इस बार उपर वाली बर्थ से वाइब्रेशन की आवाज आ रही थी....
“हेल्लो पापा.... हा में एकदम ठीक हु आप फ़िक्र मत करो....पापा में आपकी बिटिया हु अपने या किसी दूसरी लड़की के साथ किसी हालत में बुरा नहीं होने दूंगी....गुड नाईट”
मुझे ख़ुशी हुई की आज कोई देश की लडकी खुद में छिपी रानी लक्ष्मीबाई को देख रही थी J

ट्रेन का सफर जारी रहेगा अपनी प्रतिक्रिया देना ना भूले....

शुक्रिया J

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