ट्रेन - 2
ट्रेन उमरिया जंक्शन पहुंची...
तभी ‘पेट में फुटबोल फ़साये
हुए एक अंकल’ (किट्टू दा की भाषा में बोते तो “गर्भवती पुरुष” ;)) हमारे बिच
उपस्थित हुए.....
उनके हाथ का पाकिट, गले का
चेन और मुह का पान, ये साफ बता रहा था की वो कोई ठेकेदार टाइप काम करते होगे....
“और बेटा क्या करते हो ?”
ट्रेन शुरू होते ही उसने
पहेला सवाल मेरे दोस्त की और छोड़ा, मेरे अन्नू मलिक टाइप दोस्त ने अपना रेडियो
चालू कर दिया...
मेरे सामने बैठे तीन और
इंजनियरो के पास करने को कुछ था नहीं तो उसने भी अंकल के सानिध्य में जाने का
फैसला किया. अंकल और चार चैले जनरल इंट्रोडक्शन के बाद थोडा आगे बढ़े, उन्होंने
पहले क्रिकेट का एनकाउंटर करने का फैसला किया....
“ये धोनी इंडिया को डुबोके
छोड़ेगा”
मैं धोनी और त्सुनामी के
बीच का कनेक्शन ढूँढने लगा...
अगले कुछ मिनीटो तक अंकल ने
धोनी & कम्पनी की ऐसी बजाई की अगर धोनी ये सुन लेता तो पूरी टीम इंडिया “सामूहिक
संयास” की घोषणा कर देती.....
तभी वहा से एक आदमी, बड़े
बेग में कुछ पतली किताबे और मैगज़ीन भर के निकला, उसने हर तरह की पुस्तिका थी, ‘लेटेस्ट
जनरल नोलेज’ से लेके ‘101 थाई व्यंजन’....
ट्विटर के कुछ फर्जी शायरों
को उपयोगी ऐसी “रंगीन शायरिया” भी थी....
साइड के बर्थ पे बैठे एक “सेमी
बूढ़े अंकल” ने उस आदमी को धीरे से कुछ पूछा, और उस आदमी ने उस जादुई बक्शे में से
एक पतली पुस्तिका निकाली, टाइटल शायद “जवानी की कहानी” था, अंकल खुश हुए...
पैसे देके वो फटाफट साइड
उपर बर्थ में चले गये, साधना करने.....
तो हमारे ज्ञानी अंकल ने अब
राजनीती की हत्या करने का फैसला लिया था, उन्होंने सरकार की नीतियों पे सवाल खड़े किये,
अब वहा का माहौल किसी न्यूज़रूम जैसा था और अपने अंकल थे पोलिटिकल एक्सपर्ट....
“देश का कुछ नही हो सकता, ये स्वछता अभियान बस
पैसो की बर्बादी है और कुछ नहीं, ये देखो रेल के हालात में कुछ फर्क पड़ा क्या ?”
अंकल ने डायलोग खत्म कर के पान मसाला निकला, उसे खोल के अपने मुह में अर्पण किया
और उस तुच्छ रेपर को सामने की सिट के नीचे पहुंचा दिया...
“बेटा तुम आगे क्या करोगे ?”
अंकल ने Mr.फॉर्मल सूज से
पुछा,
“अंकल जॉब करनी है सरकारी
हो तो ज्यादा अच्छा है”
फिर अंकल ने कुछ बिलकुल ही
नॉन टेक्निकल सवाल पूछे जो किसी इंजनियरिंग किताब में नहीं थे नाही नई इंडस्ट्री
में किसी काम के, कुछ प्रश्नों का जवाब देने की बन्दे ने कोशिश की पर अंकल ने उसे
और उलजा दिया, मेरे पास बैठे और तीन इंजनियर इस बहस में उतर पड़े पर अंकल सबको अपने
अंदाज में बैज्जत करने लगे, मैंने महसूस किया की यहा सिर्फ इस लडको की बेइजती नहीं
हो रही बल्कि पुरे इंजनियरिंग जमात की बेइजती हो रही थी, अब पानी सिर के उपर चढ़
रहा था....
“अच्छा तो अंकल आप कब कुए
से बहार निकल रहे हो ?” मैंने 140 की स्पीड का योर्कर फेका....
“क्या” अंकल किसी टेल एंडर
बेट्समेन की तरह हक्का बक्का रह गये...
“यही की आप अपने दिमाग के
दरवाजे कब खोल ने वाले हो ?” मैंने अपनी लाइन लेंग्थ बनाई रखी...
“तुम्हे बडो से बात करने की
तमीज...”
“तमीज है तभी आप कहके बात
कर रहा हु, और में यहा कोई बहेस नहीं कर रहा हु बस जवाब दे रहा हु आपके सवालों का”
मैंने ‘चाणक्य डिप्लोमसी’ से मुद्दे को अपने हाथ में लिया...
“आपको अमेरिका का भारत आना
पसंद नही है, हम लोगो का MNC में काम करना पसंद नहीं है, बहार की टेक्नोलोजी का
सीखना पसंद नही है क्यों की आपको लगता है की वो हमारी विरासत को खत्म कर देगी...
माफ़ करना अंकल में पर आप
यहा गलत हो...
हमारी आने वाली पीढ़ीयो को
अच्छी विरासत देने के लिए हमे ये करना जरुरी है, दुनिया के कदम से कदम मिला के चलने
के लिए हमे ये करना जरुरी है, संस्कृति और विरासत के नाम पे अब हम देश को गोबर से
ढंक के नहीं रख सकते अब बदलाव जरुरी है अंकल”
“सिर्फ बातो करने से कुछ
नही होता, तुमने अभी दुनिया नहीं देखि, तुम अभी अंगूठाछाप हो अंगूठाछाप...”
“हमारी स्किल और नोलेज पर
सवाल उठाने से पहले ये जान लीजिये की इस दशा के भी जिम्मेदार आप जैसे लोग ही है जो
नये और बिन अनुभवी लोगो को सदा नीचा दिखाने की फ़िराक में होते है, कभी आप भी
अंगूठाछाप रहे होंगे आपको अगर कोई कुछ नहीं सिखाता तो आज आप हमसे ये बाते करने के
काबिल भी होते क्या ?.....
आप यूथ का पोटेंशियल देखो ना, हरबार उसे बाबा
आदम के टाइम के पेरामीटर में क्यों तोलते हो ?”
मुझे पता नहीं रहा की जवाब
देते देते मेरी आवाज कब उपर चली गई, पुरे सेक्शन की हर मुंडी मेरी और मुड़ी हुई थी,
सिवाय एक के...
साइड अपर बर्थ पे बिराजमान
अंकल अभी भी “जवानी की कहानी” में घुसे हुए थे, मुझे ख्याल आया की ह्यूमन नेचर में
आज भी सेक्स सबसे रसप्रद मुद्दा है....
मेरे सामने बैठे अंकल की
पिस्तल में अब गोलिया खत्म हो गई थी, मेरे पास बैठे चारो इंजनियर के चहेरो पे ख़ुशी थी( जित
की ख़ुशी कहेना ठीक नहीं होगा) सेक्शन का हर आदमी अब मुझे पहचान ने लगा था....
अंकल ने फिर पान मसाला निकाला
और मैंने एक और तीर....
“हम स्वछता अभियान की बात
करते है, पर ये क्या सिर्फ सरकार का काम है?, क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं है
इसके प्रति ?”
तीर एकदम निशाने पर लगा...
अंकल ने खाली रेपर अपनी जेब
में रख दिया....
थोड़ी देर तक आसपास के लोगो
से नोर्मल बाते होती रही, अंकल चुप थे...
“सोरी अंकल अगर आपको किसी
बात का बुरा लगा हो तो” मैंने भारतीय मूल्यों के जतन करने की कोशिश की...
“अरे बेटा तुमने बिलकुल सही
कहा और अपना पक्ष रखने की वजह से कभी किसी से माफ़ी मत मांगना” अंकल की टोन एकदम
सामान्य थी जो मुझे अच्छा लगा...
फिर कटनी स्टेशन तक हम अलग
अलग मुद्दों पे नोर्मल बात करते रहे, उनकी वजह से मुझे संस्कृत से लेके पर्यावरण
तक विषयों में उपयोगी ऐसी काफी जानकारी मिली...
“तुम से मिलके अच्छा लगा
बेटा, गुड लक”
“थैंक यू, अंकल”
हमारी ऐसी बोन्डिंग देख के
आसपास वाले लोग काफी अजीब महसूस कर रहे थे.....
अब ट्रेन कटनी स्टेशन पे
थी....
“लो भाई, होम मेड है” चंगेज
खान ने मुझे केक ऑफर की...
मैंने एक टुकड़ा उठाया और
उसी वक़्त एक आवाज आई “excuse me, जगह दीजिये प्लीज”, बेशक इंजनियरिंग कान ने आवाज
सुनके लडकी की ऊम्र का पता लगा लिया था...
हा, ये शाफ़्ट हमारे गियर
बॉक्स की थी..... ;)
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