ट्रेन - 1
“अरे भाग नहीं तो ट्रेन छुट
जाएगी”
मेरे आगे दौड़ रहे साढ़े पांच फुट के दोस्त के कंधो पे उसके वजन के पांचवे हिस्से
का बोज टंगा हुआ था| इस बोज की वजह से उसकी पीठ 60 के एंगल पर झुक गई थी|
भारतीय रेल की परम्परा
निभाते हुए हमारी नर्मदा एक्सप्रेस भी पुरे 2 घंटे लेट थी| किसी आर्मी सेशन सी एनर्जी
वेस्ट करने के बाद अब मेरा दोस्त उसे रिकवर करने में लगा था, अबतक का स्कोर था 2
पेकेट चिप्स पर एक बोटल स्प्राइट|
उस वक़्त इंडियन रेल ने
गालिया खाने के मामले में आशुतोष,KRK एवम् आफ्रीदी को पीछे छोड़ दिया था| प्लेटफोर्म की घड़ी थोडा ‘uncomfortable’
महसूस कर रही थी, साला हर कोई उसे घूरे जा रहा था| कुछ महानुभाव पटरी को ऐसे देख रहे थे की उनकी “दीर्घद्रष्टि”
से चमत्कार होगा और नर्मदा एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पे प्रगट हो जाएगी|
आखिर ट्रेन प्लेटफॉर्म पे आ
पहुंची| लोग जोम्बिज की तरह ट्रेन पे टूट पड़े, हमने भी अपनी सिटे संभालली| हमारे सेक्शन में तीन और
लडके थे जो लीगली वहा बैठ सकते थे पर कुछ टिपिकल इंडियन अंकल्स ‘बेटा जरा एडजस्ट
करना’ बोलके बकायदा हमारी सिटो पे कब्जा जमा रहे थे|
“हाय, में आयुष और ये मेरा
दोस्त कुश”
मेरे फ्रेंक दोस्त ने
हमउम्र लड़को को मैत्री प्रस्ताव भेजा, सामने से भी उत्साहभरा रिप्लाय आया, मुझे
उनके नाम याद नहीं रहे क्युकी में तो उनके सतरंगी कपड़ो को ही देख रहा था|
विंडो सिट पे बैठा लड़का बेशक
सलमान खान का फेन होगा, उसके ‘भाई छाप’ ब्रेसलेट से मैंने अनुमान लगाया| उसके पास वाला लड़का थोडा
मोटा सा था, उसने ब्लू कलर का पार्टी वेयर शर्ट पहना था| मेरे अंतर्मन में उसके लुक
को थोडा एडिट करने के बाद मैंने पाया की उसमे और पोर्न मूवीज के प्रोडूसर में काफी
समानताए थी, मेरी आँखे ‘शक मोड़’ में आ गई, उसके पास वाला लड़का शक्ल से ही इंजीनयर
दिख रहा था, वो यह भी इंटरव्यू में पहनने लायक फॉर्मल शूज पहने बैठा था, क्या पता
कोई नौकरी ट्रेन में उसका इंतजार कर रही हो ?
“हम महेंद्रगढ़ गये थे, वहा
हमारे दोस्त के भाई की शादी थी, बड़ी मस्त जगह है” मेरे इंजीनयर दोस्त ने पूरी
रिपोर्ट पेश की|
“हम भी हमारे दोस्त की शादी
में गये थे, वैसे आप क्या करते हो ?”
“में इंजीनयर हु”
“अरे, हम भी....” और तीनो
ने एकसाथ मेरे दोस्त को ‘हैप्पीदेंट स्माइल” दिखाई|
“जुते अच्छे है भाई तेरे”
सलमान खान मेरे जूतों की तारीफ कर रहा था| में थैंक्स बोलू उससे पहले बिच में बैठा ‘चंगेज
खान’ (अरुणलाल की भाषा में बोले तो) convo
की दिशा में चतुराई से परिवर्तन कर गया|
“ऐसे ही सेम थे मेरे भाई के
पास”
“वो वाले डूब्लीकेट थे ये
ओरिजनल दिख रहे है, देख Reebok का स्पेलिंग भी सही है”
“लो भाई अब 60 रुपए के ‘दबंग
स्टाइल’ चश्मे पहनने वाले ओरिजनल और डूब्लिकेट और असली की बाते करेंगे” चंगेज खान
ने घी डाल दिया था, बात मुझतक पहुंचे उससे पहेले ही मैंने “कट लेना” का फैसला किया....
“मैं फोन चार्ज कर के आता
हु” अपने दोस्त को बोल के में बहेस से बहार निकला|
मैं अब दरवाजे के पास खड़ा
होकर खुल्ली हवाओ का लुफ्त उठा रहा था, रेल आपको असली भारत का सफर करवाती है, यहाँ
आप देश के हर रंग से रूबरू होते हो...
“चना चना चना”
“एक कर दो” प्लेट या पेकेट
जैसे कुछ शब्द मुझे समज नहीं आये तो मैंने सिर्फ नंबर बोलना ज्यादा सही समजा|
आमतौर पे मैं ट्रेन में कोई
खाने की चीज नहीं खरीदता पर ये कुछ ज्यादा ट्रेडिशनल लग रहा था तो मैंने उसे
आजमाने का सोचा|
पेड़ के पत्तो से बने बाउल
में उसने कुछ चने लिए उसमे प्याज, नमक, निम्बू और दो चार दुसरे मसाले डालके उसे उसने अपने एक खास अंदाज में मिलाया, किसी
साऊथ के हीरो की तरह| उस क्रिया में उसकी ख़ुशी साफ जलक रही थी...
शायद वो अपना अंदाज सबको
दिखाना चाहता था....
शायद वो अपनी कोई मज़बूरी
छिपाना चाहता था....
मैंने चने चखे और उसी बीच
मेरा दोस्त आ टपका...
“अरे चने....”
बिना किसी देरी के एक आदर्श
इंजीनयर की तरह उसने अपने मुह में जितने डाल सकता था उतने चने एकसाथ डाल दिए!
“अच्छे है....”
मुझे समज नहीं आया की आवाज
को बहार निकलने की जगह कहा से मिल गई?
ट्रेन रुक रुक के चलती गई
और हमे भिन्न भिन्न प्रकार के प्राणी के दर्शन होते रहे....
ट्रेन उमरिया जंक्शन पहुंची...
अभी तो सफ़र शुरू हुआ है, इन्दोर तक के इस सफर में अभी बहुत कुछ होना बाकि है....
आगे का सफर ट्रेन-2 में...
अपनी प्रतिक्रिया जरुर देवे.... ;)
मजा आ गया। बहुत खूब
जवाब देंहटाएंshukriya bhai, train ka safar aage aur bhi majedar hai padhana jarur.....
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